Sunday, 1 July 2018

वो

वल्लाह क्या उम्र आयी गजब
इसके क्या है कहने
वो चाहता है ये
 कि उसके बारे में
माँ से ज्यादा, दोस्त जाने 

बहुत दिनों बाद, आयी कान्हा तेरी याद

अपनी शरीर की परेशानियों में झूल रही हूँ ऐसे,
लग रहा है कान्हा तुमको भूल गयी हूँ जैसे,
साथ था तेरा जब , चारों ओर ख़ुशी थी
लगता है अब मुझे, चुभ रहे हों शूल जैसे
अपने और अपने वालों के मोह में, फंस गयी हूँ ऐसे
आटा देख कर कांटे में फंसी , मछली  तड़पे जैसे
कान्हा, ओ कान्हा, मुझे आकर तुम बचाना
मेरे  अंतर्मन में फिर से, अपना मंदिर बनाना
कान्हा  तू जल्दी आना, तड़प रही हूँ मै
मेरी गोदी में खेलना, मुझे अपना मुख दिखाना 
ओ कान्हा जल्दी आना, ओ कान्हा जल्दी आना

Wednesday, 25 October 2017

बरसों पहले

बरसों पहले
हिज्र की चोट कुछ ऐसी लगी
दिल पे चुभन उसकी ,  आज भी बाकि है
यादें आज भी सताती है उसकी हमको
 खोल के दिखाए अपना दिल अगर
दिल पे निशाँ उसका,आज भी बाकि है 

Wednesday, 2 August 2017

चलो फिर थोड़ा आशिकाना हो जाएँ

रात भर बाजार तेरी  यादों का लगाए रहे
सुबह तक आंसुओं की शमा भी जलाये रहे
 शाम ढले तक फिर रहे  बेहोश से
बिन तेरे रात और दिन यूं ही गुजरते रहे
थोड़ी जो बची है  जिंदगी मेरी
कट जाएगी यूँही
कभी हम होश में रहे, कभी बेहोश रहे

Sunday, 14 May 2017

बिजी

एक चिंता ,भीतर ही भीतर
 खाये जा रही है
किसके सहारे ,
 कटेगा बुढ़ापा हमारा
 नयी पीढ़ी तो  यारों
बिजी बहुत है


Saturday, 13 May 2017

राम नाम गाओ

तरसना नहीं है
तड़पना  नहीं है
सहनशीलता को तुम अपना लो
चम्बा, डलहौज़ी
रानीखेत हो या कौसानी
तुम्हारे हिल स्टेशन घूमने के दिन
 चुक गए सुनीता जी
अब या तो स्पेशलिस्ट डॉ. के
चक्कर लगाओ
या बंद कमरे में ए. सी.में बैठकर
राम नाम गाओ
हरी नाम गाओ  

Thursday, 11 May 2017

सुकून

सुकून, सुकून, सुकून चाहिए
मुझे दिलो दिमाग पुरसुकून चाहिए
कोशिश है की न हो मुझसे नजरंदाज कोई
उम्मीदें  किसी से भी करती नहीं हूँ
माना  कि, तारीफ़ नहीं है हाथ की लकीरों में
पर किसी से रुसवाई भी तो  नहीं चाहिए
सुकून, सुकून, सुकून चाहिए 
मुझे दिलो दिमाग पुरसुकून चाहिए