Saturday, 3 August 2013

माँ मेरी माँ ही नहीं


माँ मेरी माँ ही नहीं
वो गुरु भी है और सखी भी

मैं अपनी माँ की लाडली हूँ
मैं नाजों से पली बढ़ी हूँ

माँ हर पग पर मुझे संभालती है
दुःख में ढाल  बन जाती है
सुख में उत्साह बढाती है
जीवन के हर पहलु को समझाती है
गलती करने पर डांटती  है
 सांसारिक बातो के साथ साथ
 वो अध्यात्मिक द्रिस्टान्त  भी सुनाती है
इसलिए मैं कहती हूँ

माँ मेरी माँ ही नहीं
वो गुरु भी है और सखी भी  

2 comments:

  1. the same way aap humari bua hi nahin guru bhi hain:D

    Bua bhaut badiya hai!! now i understand where Akhil Bhaiya got his skills from. :D

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